स्रोत: शेयर वाले फ़ंड पर कैपिटल गेन टैक्स — आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 196 और 198; Nifty 50 का पुराना रिटर्न — NSE Indices का NIFTY 50 Total Returns Index (niftyindices.com)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
SIP क्या है?
SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) म्यूचुअल फ़ंड में हर महीने एक तय रकम डालने का तरीका है। पैसा आपके बैंक खाते से अपने-आप कटता है और उस दिन के भाव पर फ़ंड की यूनिट ख़रीदता है। इससे बाज़ार का सही समय चुनने की चिंता नहीं रहती।
छोटी SIP से भी फ़र्क पड़ता है?
हाँ, अगर वह लंबी चले। ₹5,000 हर महीने, 20 साल तक, 12% सालाना पर ₹49.96 लाख बन सकते हैं, जबकि आप कुल ₹12 लाख ही डालते हैं। हर फ़ंड की कम से कम रकम अलग होती है — फ़ंड की जानकारी में देखें।
SIP कितने साल चलानी चाहिए?
जितनी लंबी, उतना अच्छा, क्योंकि बढ़त पर बढ़त सबसे ज़्यादा आख़िरी सालों में मिलती है। ऊपर के उदाहरण में 5 साल देर से शुरू करने पर ₹24.73 लाख कम बनते हैं। शेयर वाले फ़ंड में पैसा कम से कम 5–7 साल रखने की सोचें।
SIP पर टैक्स कैसे लगता है?
शेयर वाले फ़ंड की यूनिट 12 महीने से ज़्यादा रखकर बेचें, तो एक साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफ़े पर 12.5% टैक्स लगता है; इससे पहले बेचें तो 20%। हर किस्त की यूनिट का समय अलग गिना जाता है।
SIP में कितना रिटर्न मिलता है?
कोई तय रिटर्न नहीं है। Nifty 50 (डिविडेंड समेत) 2000 से 2025 तक औसतन 13.2% सालाना बढ़ा, पर बीच में -51.27% जैसे बुरे साल भी आए। इसलिए योजना कम रिटर्न मानकर बनाएँ।
क्या SIP बीच में रोक सकते हैं?
हाँ, ज़्यादातर फ़ंड में SIP कभी भी रोक या बदल सकते हैं, और जमा यूनिट वैसी ही रहती हैं। जल्दी बेचने पर कुछ फ़ंड एग्ज़िट लोड लेते हैं, और टैक्स बचाने वाले ELSS फ़ंड की हर किस्त 3 साल के लिए बंद रहती है।